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	<title>इंदौर &#8211; TIMES OF CRIME</title>
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	<description>‘‘टाइम्स ऑफ क्राइम’’ (अपराध जगत का लेखा-जोखा )</description>
	<lastBuildDate>Thu, 01 Jan 2026 16:15:35 +0000</lastBuildDate>
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		<title>इंदौर में &#8216;जहर&#8217; बना पानी! 9 मौतें, सवालों के घेरे में सत्ता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[TIMES OF CRIME]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Jan 2026 16:15:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर में 'जहर' बना पानी! 9 मौतें]]></category>
		<category><![CDATA[मासूम अव्यान]]></category>
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					<description><![CDATA[जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036 इंदौर. देश का सबसे स्वच्छ, सबसे स्मार्ट और सबसे सक्षम शहर कहलाने वाला इंदौर आज दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों बीमार नागरिकों की कराह से शर्मसार है। करीब 1200 से 1300 लोगों का अस्पतालों में भर्ती...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036</p>



<p><strong>इंदौर. देश का सबसे स्वच्छ, सबसे स्मार्ट और सबसे सक्षम शहर कहलाने वाला इंदौर आज दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों बीमार नागरिकों की कराह से शर्मसार है। करीब 1200 से 1300 लोगों का अस्पतालों में भर्ती होना और कई निर्दोष नागरिकों की जान जाना, किसी प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही, प्रशासनिक निकम्मेपन और सत्ता की असंवेदनशीलता का नतीजा है।</strong></p>



<blockquote class="wp-block-quote has-vivid-red-color has-text-color has-link-color wp-elements-37b13b8b3fc21c3ac94ac09443c2a4dd is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p class="has-text-align-center"><strong>देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में फैली जल त्रासदी की सबसे दुखद तस्वीर सामने आई है. </strong></p>
</blockquote>



<p>विडंबना यह है कि यह भयावह घटना उस क्षेत्र में घटी है जो प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का गृह क्षेत्र है। यदि एक प्रभावशाली मंत्री के क्षेत्र में नागरिकों को शुद्ध पेयजल तक नहीं मिल पा रहा, तो यह सीधे-सीधे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। क्या विकास केवल पोस्टरों और विज्ञापनों तक सीमित है? क्या आम जनता की जान की कोई कीमत नहीं?</p>



<p>पानी जीवन है—यह कोई नारा नहीं, बल्कि बुनियादी सच्चाई है। फिर भी इंदौर में वही पानी मौत का कारण बन गया। नगर निगम, जल प्रदाय विभाग और स्वास्थ्य विभाग—तीनों की भूमिका संदेह के घेरे में है। क्या जल की नियमित जांच नहीं होती? क्या दूषित पानी की जानकारी समय रहते नहीं मिली? और यदि मिली, तो उसे छिपाया क्यों गया?</p>



<p>सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया भी उतनी ही चिंताजनक रही है जितनी घटना स्वयं। न तत्काल चेतावनी, न वैकल्पिक जल व्यवस्था, न ही जिम्मेदारी तय करने की तत्परता। मौतों के बाद औपचारिक बयान, खानापूर्ति जांच और आश्वासनों की राजनीति—क्या यही सुशासन है?</p>



<p>स्वच्छता पुरस्कारों और स्मार्ट सिटी टैग के पीछे छिपा यह कड़वा सच अब सामने आ चुका है। चमकते शहर के भीतर बुनियादी व्यवस्थाएं खोखली हैं। यह घटना उन तमाम दावों को बेनकाब करती है, जिनके सहारे सरकारें अपनी पीठ थपथपाती रही हैं।</p>



<p>सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि अब तक किसी ने नैतिक जिम्मेदारी क्यों नहीं ली? क्या किसी अधिकारी ने इस्तीफा दिया? क्या किसी मंत्री ने सार्वजनिक रूप से जवाबदेही स्वीकार की? या फिर यह मान लिया गया है कि जनता सब कुछ सह लेगी?</p>



<p>यह केवल इंदौर का मामला नहीं, यह पूरे प्रदेश की चेतावनी है। यदि आज दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, यदि जल आपूर्ति प्रणाली की संपूर्ण समीक्षा नहीं की गई, और यदि जवाबदेही तय नहीं हुई—तो कल किसी और शहर में यही त्रासदी दोहराई जाएगी।</p>



<p>जनता को अब संवेदनाहीन बयान नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। उसे जानना है कि मौतों का जिम्मेदार कौन है, दोषियों को सजा कब मिलेगी, और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठाएगी।</p>



<p>इंदौर की यह घटना सत्ता के अहंकार और प्रशासनिक विफलता का आईना है। यदि सरकार सच में जनता के प्रति जवाबदेह है, तो उसे अब शब्दों से नहीं, कार्यवाही से प्रमाण देना होगा—क्योंकि इतिहास गवाह है, जब जनता का सब्र टूटता है, तो सत्ता का सिंहासन भी डगमगाता है।</p>



<p><strong>दूषित पानी ने ले ली 5 माह के मासूम अव्यान की जान&#8230;&#8230; </strong></p>



<p>देश के सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाले इंदौर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने इस दावे को गहरे सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पीने के पानी ने 5 महीने के मासूम अव्यान की जान ले ली। जिस पानी को उसकी मां ने दूध को हल्का करने के लिए इस्तेमाल किया था, वही पानी बच्चे के लिए जानलेवा साबित हुआ।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>महिला खिलाड़ियों या पर्यटकों के साथ अभद्रता : इंदौर की घटना बनी राजनीति का नया मैदान, महिला सुरक्षा बनाम राजनीतिक बयानबाज़ी का खेल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[TIMES OF CRIME]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Oct 2025 17:48:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[खेल खिलाड़ी]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों]]></category>
		<category><![CDATA[अभद्रता]]></category>
		<category><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया महिला खिलाड़ी]]></category>
		<category><![CDATA[कैबिनेट मंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[कैलाश विजयवर्गीय]]></category>
		<category><![CDATA[क्रिकेट वर्ल्ड कप]]></category>
		<category><![CDATA[महिला सुरक्षा]]></category>
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					<description><![CDATA[इंदौर की घटना बनी राजनीति का नया मैदान, महिला सुरक्षा बनाम राजनीतिक बयानबाज़ी का खेल भोपाल // विजया पाठक इंदौर. क्रिकेट वर्ल्ड कप खेलने आई ऑस्ट्रेलिया की महिला खिलाड़ी के साथ हुई अभद्रता ने न केवल खेल भावना को आहत किया है बल्कि इसने मध्यप्रदेश की छवि और पुलिस व्यवस्था पर भी गहरे सवाल खड़े...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<h2 class="wp-block-heading has-text-align-center has-vivid-red-color has-text-color has-link-color wp-elements-8e3747c8b05bba87b41e15b08d6362ff">इंदौर की घटना बनी राजनीति का नया मैदान, महिला सुरक्षा बनाम राजनीतिक बयानबाज़ी का खेल</h2>



<ul class="wp-block-list">
<li class="has-vivid-purple-color has-text-color has-link-color wp-elements-160f657f24d2a11992f4a75cfc98cd28"><strong>पुलिस प्रशासन और सरकार की नहीं बल्कि पूरे समाज की विफलता है यह घटना</strong></li>



<li class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color has-link-color wp-elements-410e37be7d7ff45494c266eafdac14c6"><strong>इंदौर जिसे देश &#8221;स्वच्छता की राजधानी&#8221; के रूप में जानता है, आज एक दुर्भाग्यपूर्ण कारण से सुर्खियों में है</strong></li>



<li class="has-vivid-purple-color has-text-color has-link-color wp-elements-9c5458d500a089ce332dc261ce686abc"><strong>महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है कैलाश विजयवर्गीय का बयान</strong></li>
</ul>



<p><strong>भोपाल // विजया पाठक</strong></p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color has-link-color wp-elements-4e72e945103f4b22ab39e93a24910bec"><strong>इंदौर. क्रिकेट वर्ल्ड कप खेलने आई ऑस्ट्रेलिया की महिला खिलाड़ी के साथ हुई अभद्रता ने न केवल खेल भावना को आहत किया है बल्कि इसने मध्यप्रदेश की छवि और पुलिस व्यवस्था पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जो घटना खेल के मैदान से जुड़ी होनी चाहिए थी वह अब राजनीति के अखाड़े में परिवर्तित हो चुकी है। ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेटर वर्ल्ड कप मैच के बाद इंदौर के एक बाजार में पहुंची थीं जहाँ कुछ युवकों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। </strong></p>



<p>मामला जैसे ही सामने आया प्रदेश का माहौल गर्मा गया। पुलिस ने पहले तो घटना को छोटी गलतफहमी बताकर टालने की कोशिश की लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने यह साफ कर दिया कि घटना गंभीर है और सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन भी हुआ है। यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जब विदेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोटोकॉल के तहत होती है तो आखिर एक विदेशी महिला खिलाड़ी कैसे बिना सुरक्षा घेरे के खुले बाजार तक पहुंच गई। क्या यह पुलिस प्रशासन की चूक थी या प्रोटोकॉल का उल्लंघन।</p>



<p><strong>प्रशासनिक विफलता और लीपापोती की कोशिश</strong></p>



<p>घटना के बाद पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया ने सवालों को और बढ़ा दिया। पहले तो पुलिस ने कहा कि खिलाड़ी अकेले नहीं थीं। बाद में कहा गया कि गलतफहमी हुई और जब मामला मीडिया में फैल गया तो लीपापोती शुरू हो गई। इंदौर पुलिस अब यह साबित करने में लगी है कि घटना उतनी बड़ी नहीं जितनी दिखाई जा रही है”परंतु प्रश्न यह नहीं है कि घटना कितनी बड़ी थी। प्रश्न यह है कि ऐसी घटना हुई क्यों। प्रदेश की कानून व्यवस्था और विशेषकर महिला सुरक्षा के प्रति सरकार के दावे इस एक घटना से कमजोर होते दिखे हैं।</p>



<p><strong>राजनीति ने पकड़ा तूल</strong></p>



<p>मामला और भी गरम तब हुआ जब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस घटना पर बयान दिया। विजयवर्गीय ने कहा था ऐसी घटनाएँ राज्य की छवि को धूमिल करती हैं। इसलिए पुलिस को और सतर्क रहना चाहिए। उनका यह बयान राज्य की छवि को लेकर चिंता का प्रतीक था। लेकिन कांग्रेस ने इसे महिला खिलाड़ी के प्रति असंवेदनशीलता बताकर राजनीतिक रंग दे दिया। बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और सोशल मीडिया पर इसे महिला विरोधी टिप्पणी के रूप में प्रचारित किया गया। राजनीति के इस नए मोड़ ने मुद्दे को पूरी तरह महिला सुरक्षा से हटाकर बयानबाज़ी की लड़ाई में बदल दिया। जहां एक ओर भाजपा नेता यह कह रहे हैं कि विजयवर्गीय का आशय प्रशासन की लापरवाही को इंगित करना था वहीं कांग्रेस ने इसे राज्य सरकार की महिला सुरक्षा के प्रति लापरवाही से जोड़ दिया।</p>



<p><strong>खेल सुरक्षा और जिम्मेदारी</strong></p>



<p>यह कोई पहला मौका नहीं है जब महिला खिलाड़ियों के साथ ऐसी घटना घटी हो। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लंदन] सिडनी] जोहान्सबर्ग और दिल्ली जैसे शहरों में विदेशी महिला खिलाड़ियों या पर्यटकों के साथ अभद्रता की घटनाएँ हो चुकी हैं। परंतु जब ऐसा किसी खेल आयोजन से जुड़े व्यक्ति के साथ होता है तो इसका प्रभाव केवल स्थानीय नहीं रहता बल्कि देश की वैश्विक छवि और खेल कूटनीति पर भी पड़ता है। इंदौर में घटी यह घटना भारत के लिए एक कूटनीतिक और छवि-संबंधी चुनौती बन सकती है। यह समय है जब भारत खेल पर्यटन और निवेश के माध्यम से ग्लोबल इमेज मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है। ऐसे में इस प्रकार की घटनाएँ सॉफ्ट पावर के लिए खतरा हैं।</p>



<p><strong>व्यवहारिक संवेदनशीलता की आवश्यकता</strong></p>



<p>सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए कई योजनाएँ चलाई हैं 108 महिला हेल्पलाइन महिला थाना सेफ सिटी प्रोजेक्ट सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था और नारी शक्ति मिशन जैसी पहलें। फिर भी जब कोई विदेशी महिला खिलाड़ी बाजार में असुरक्षित महसूस करती है तो यह दर्शाता है कि प्रणालियाँ मौजूद तो हैं पर संवेदनशीलता का अभाव है। महिला सुरक्षा केवल कानून और हेल्पलाइन से नहीं आती वह आती है सामाजिक मानसिकता में परिवर्तन से और यही वह पहलू है जहाँ सरकार और समाज दोनों को आत्ममंथन करना चाहिए।</p>



<p><strong>संवेदनशील मुद्दे पर तुष्टिकरण नहीं समाधान आवश्यक</strong></p>



<p>राजनीतिक दलों का यह कर्तव्य है कि वे ऐसे मुद्दों को संवेदनशीलता से संभालें परंतु वर्तमान परिदृश्य में यह घटना भी राजनीतिक लाभ के खेल में तब्दील हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने इसे राजनीतिक हथियार बना लिया जहाँ एक पक्ष प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर रहा है तो दूसरा पक्ष बयान की गलत व्याख्या पर सफाई दे रहा है। इस बीच असली सवाल महिला सुरक्षा की जमीनी हकीकत और विदेशी मेहमानों की सुरक्षा व्यवस्था कहीं गुम हो गया है।</p>



<p><strong>इंदौर की पहचान स्वच्छता से संवेदनशीलता की ओर</strong></p>



<p>इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार सात बार देश का नाम रोशन किया है। अब आवश्यकता है कि वह सुरक्षा और संवेदनशीलता की राजधानी बने। यह तभी संभव है जब प्रशासनिक तत्परता के साथ-साथ नागरिक चेतना भी जागे। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और पर्यटकों के लिए सुरक्षा के विशेष प्रोटोकॉल बनाए और उनका पालन सुनिश्चित करे।</p>



<p><strong>खेल भावना की पुनर्स्थापना</strong></p>



<p>इंदौर की यह घटना एक चेतावनी है कि महिला सुरक्षा और प्रशासनिक सजगता किसी भी राज्य की छवि के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। डॉ. मोहन यादव सरकार ने हाल ही में नारी शक्ति मिशन के तहत महिला सम्मान और सुरक्षा के कई अभियान शुरू किए हैं परंतु इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून से अधिक जरूरी है उसका पालन और क्रियान्वयन। राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे इस घटना को राजनीतिक हथियार नहीं बल्कि सामाजिक सुधार का अवसर मानें। कैलाश विजयवर्गीय का बयान चाहे जिस रूप में लिया गया हो मूल मुद्दा यही है अगर एक विदेशी महिला खिलाड़ी हमारे देश में असुरक्षित महसूस करती है तो यह केवल सरकार की नहीं पूरे समाज की विफलता है।</p>



<p><strong>‘‘टाइम्स ऑफ क्राइम’’ : सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036</strong></p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>एक सूची उन भ्रष्ट अधिकारियों की भी बनाएं, जिनके दफ्तरों में बार-बार RTI आवेदन लगाए जाते हैं : राहुल सिंह पूर्व राज्य सूचना आयुक्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[TIMES OF CRIME]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 18:26:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[RTI ( सूचना का अधिकार )]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[- शिवम वर्मा]]></category>
		<category><![CDATA[rti]]></category>
		<category><![CDATA[RTI एक्टीविस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[कलेक्टर]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य सूचना आयुक्त]]></category>
		<category><![CDATA[राहुल सिंह पूर्व राज्य सूचना आयुक्त]]></category>
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					<description><![CDATA[RTI आवेदन बार-बार लगाने वालों की सूची तैयार करने का आपका विचार स्वागत योग्य है। पर साथ ही, कुछ और सूचियों की जरूरत है :- मप्र में सूचना आयुक्त रहते हुए मैंने कुछ RTI आवेदक और अधिकारी के मैच फिक्सिंग के खेल को बेहद करीब से देखा और संभवत मैं देश में एक मात्र सूचना...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>RTI आवेदन बार-बार लगाने वालों की सूची तैयार करने का आपका विचार स्वागत योग्य है। पर साथ ही, कुछ और सूचियों की जरूरत है :-</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li><img decoding="async" height="16" width="16" alt="👉" src="https://static.xx.fbcdn.net/images/emoji.php/v9/t51/1/16/1f449.png"> एक सूची उन भ्रष्ट अधिकारियों की भी बनाएं, जिनके दफ्तरों में बार-बार RTI आवेदन लगाए जाते हैं।</li>



<li><img decoding="async" height="16" width="16" alt="👉" src="https://static.xx.fbcdn.net/images/emoji.php/v9/t51/1/16/1f449.png"> एक सूची उन भ्रष्ट कामों की भी बनाएं, जिनकी जानकारी को बार-बार RTI में छिपाने का प्रयास किया जाता है।</li>



<li><img decoding="async" height="16" width="16" alt="👉" src="https://static.xx.fbcdn.net/images/emoji.php/v9/t51/1/16/1f449.png"> एक सूची उन अधिकारियों की भी जारी करें, जो कहते हैं कि RTI की वजह से “विकास कार्य” रुक रहे हैं।</li>



<li><img decoding="async" height="16" width="16" alt="👉" src="https://static.xx.fbcdn.net/images/emoji.php/v9/t51/1/16/1f449.png"> एक सूची उन अधिकारियों की भी बनानी चाहिए, जो RTI लगाकर ब्लैकमेल करने वालों के विरूद्ध BNS की धारा 351 के तहत FIR दर्ज नहीं कराते। जबकि BNS में FIR दर्ज़ कराने के स्पष्ट प्रावधान है।</li>



<li><img decoding="async" height="16" width="16" alt="👉" src="https://static.xx.fbcdn.net/images/emoji.php/v9/t51/1/16/1f449.png"> और एक सूची उन अधिकारियों की भी बननी चाहिए, जिनके पक्ष में कुछ तथाकथित RTI आवेदक “संतुष्टि का प्रमाण पत्र” देकर, सूचना आयोग में अपीलों को खारिज करवाने का खेल खेलते हैं।</li>
</ul>



<p>मप्र में सूचना आयुक्त रहते हुए मैंने कुछ RTI आवेदक और अधिकारी के मैच फिक्सिंग के खेल को बेहद करीब से देखा और संभवत मैं देश में एक मात्र सूचना आयुक्त रहा जिसने RTI आवेदक के संतुष्टि प्रमाण पत्र के बावजूद अधिकारियों के विरुद्ध पेनल्टी लगाने की कार्रवाई की।</p>



<p>मुझे इस बात की भी छोटी सी जिज्ञासा है कि वह कौन से ऐसे पावन, पुनीत विकास कार्य है जिसको लेकर हमारे ईमानदार अधिकारी ब्लैकमेल हो रहे हैं।</p>



<p>वैसे, प्रशासन का इतना कीमती समय इतनी सारी सूचियां बनाने में नष्ट न हो, इसका एक सरल उपाय भी है:-</p>



<p>पिछले 19 वर्षों से RTI Act 2005 की धारा 4 में स्पष्ट प्रावधान है कि सभी सार्वजनिक जानकारियां स्वतः पब्लिक डोमेन में उपलब्ध कराई जाएं। अगर यह प्रावधान पूरी ईमानदारी से लागू कर दिया जाए, तो RTI का टंटा ही ख़त्म हो जाएगा।</p>



<p>हाँ, ये बात अलग है कि जब प्रशासन के सारे कामकाज पारदर्शिता से पब्लिक के सामने आने लगेंगे, तो जिस “विकास कार्य” में तेजी लाने की बात की जाती है, वहाँ शायद मंदी का माहौल बन जाए। ख़ैर आप सूची बनाए। ये जो पब्लिक है सब जानती है <img decoding="async" height="16" width="16" alt="😎" src="https://static.xx.fbcdn.net/images/emoji.php/v9/t83/1/16/1f60e.png"></p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://static.xx.fbcdn.net/images/emoji.php/v9/t7c/1/16/1f64f_1f3fc.png" alt="🙏🏼"/></figure>



<p>सूचियों के इंतजार में।</p>



<p>राहुल सिंह</p>



<p>पूर्व राज्य सूचना आयुक्त</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="603" height="1024" src="https://timesofcrime.com/wp-content/uploads/2025/10/rti-indore-603x1024.jpg" alt="" class="wp-image-818" srcset="https://timesofcrime.com/wp-content/uploads/2025/10/rti-indore-603x1024.jpg 603w, https://timesofcrime.com/wp-content/uploads/2025/10/rti-indore-177x300.jpg 177w, https://timesofcrime.com/wp-content/uploads/2025/10/rti-indore.jpg 695w" sizes="(max-width: 603px) 100vw, 603px" /></figure>



<p><strong>आरटीआई के तहत बार-बार आवेदन लगाने वालों की सूची तैयार कर रहा प्रशासन </strong></p>



<p>एक्टिविस्ट बोले- इससे पारदर्शिता खत्म होगी </p>



<p>मध्यप्रदेश शासन सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत बार-बार आवेदन लगाकर जानकारी मांगने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। हाल ही में शासन की ओर से सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके ऐसे लोगों की सूची मांगी गई है, जो बार-बार आरटीआई का उपयोग कर जानकारी मांग रहे हैं। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर सभी विभागों द्वारा ऐसे लोगों की सूची तैयार की जा रही है। </p>



<p>इधर, आरटीआई एक्टिविस्ट इसके विरोध में आ गए हैं। उनका कहना है कि आरटीआई पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। जो लोग यह काम करते हैं, वह सरकार के काम और नीतियों की कमियां बताकर सुधार के लिए सुझाव देते हैं। RTI पूरी जानकारी नहीं मिलने पर कई बार लगानी पड़ती है आरटीआईः आरटीआई एक्टिविस्ट ने बताया कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता कम होगी। </p>



<p>आईटीआई कानून इसलिए बनाया गया था, ताकि आम जनता सरकार के कामों की जानकारी प्राप्त कर सके। आदतन सूचना मंगाने वालों की सूची बनाने के पीछे सरकार का क्या उद्देश्य है, इसका अंदाजा नहीं है। कई बार एक आवेदन में संपूर्ण जानकारी नहीं मिलती इसलिए बार-बार आवेदन लगाए जाते हैं। हालांकि उन लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, जो इसका उपयोग जन कल्याण के बजाए निजी स्वार्थ के लिए करते हैं। </p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p class="has-vivid-red-color has-text-color has-link-color wp-elements-20a0fc20a25dced6288e97b1ede0efe6"><strong>कलेक्टर कार्यालय में संचालित होने वाले सभी विभागों को ऐसे लोगों की सूची बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जो आदतन सूचना के अधिकार के तहत आवेदन लगाकर जानकारी मांगते हैं। जिले के सभी शासकीय विभागों को सूची तैयार करनी है। </strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color has-link-color wp-elements-9ee51008ada4bed369980c6400942c0e"><strong>&#8211; शिवम वर्मा, कलेक्टर</strong></p>
</blockquote>



<p></p>
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		<title>दो सिर-दो दिल वाली बच्ची का जन्म: सोनोग्राफी और एक्स-रे में नहीं हुआ था खुलासा, डॉक्टर भी हैरान, हालत नाजुक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[TIMES OF CRIME]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Jul 2025 17:15:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य जगत]]></category>
		<category><![CDATA[एक्स-रे]]></category>
		<category><![CDATA[डॉक्टर नीलेश जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दो सिर-दो दिल]]></category>
		<category><![CDATA[बच्ची के दो सिर]]></category>
		<category><![CDATA[शासकीय महाराजा तुकोजीराव]]></category>
		<category><![CDATA[सोनोग्राफी]]></category>
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					<description><![CDATA[खबरों और Times of Crime से जुडनें के लिए संपर्क करें : 98932 21036 इंदौर. शासकीय महाराजा तुकोजीराव (एमटीएच) अस्पताल में एक दुर्लभ केस सामने आया है। 22 जुलाई की रात एक महिला ने ऑपरेशन से दो सिर वाली बच्ची को जन्म दिया है। जन्म के बाद से बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है...]]></description>
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<p><strong>खबरों और Times of Crime से जुडनें के लिए संपर्क करें : 98932 21036</strong></p>



<p><strong>इंदौर. शासकीय महाराजा तुकोजीराव (एमटीएच) अस्पताल में एक दुर्लभ केस सामने आया है। 22 जुलाई की रात एक महिला ने ऑपरेशन से दो सिर वाली बच्ची को जन्म दिया है। जन्म के बाद से बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है और उसे NICU में रखा गया है।</strong></p>



<p>एमटीएच के एचओडी डॉ. नीलेश दलाल ने बताया कि महिला की डिलीवरी से पहले की गई सोनोग्राफी और एक्स-रे में यह साफ नहीं हो पाया था कि बच्ची के दो सिर हैं। रिपोर्ट में जुड़वां बच्चे नजर आ रहे थे, लेकिन यह एक ही शरीर में दो सिर वाला मामला निकला, जो एक दुर्लभ मेडिकल कंडीशन है। ऐसे मामलों में बच्ची के बचने की संभावना बेहद कम होती है। सोनोग्राफी में यह सामान्य जुड़वां बच्चों का केस लग रहा था, लेकिन जन्म के बाद दो सिर होना सामने आया, ऐसे बच्चों का सर्वाइव करना बहुत मुश्किल होता है।</p>



<p>बच्ची का इलाज कर रहे पीडियाट्रिक डॉक्टर नीलेश जैन ने बताया कि जन्म देने वाली महिला की हालत स्थिर है, लेकिन बच्ची को सांस लेने में परेशानी हो रही है। उसके दो दिल हैं, लेकिन उनमें से एक ही दिल काम कर रहा है। फिलहाल बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है और दोनों सिर को अलग कर पाना संभव नहीं है। बच्ची के दो सिर हैं, दो दिल हैं लेकिन एक ही दिल सक्रिय है। सांस लेने में दिक्कत है और सर्जरी से सिर अलग करना मुश्किल है। फिलहाल डॉक्टरों की टीम लगातार बच्ची की हालत पर नजर बनाए हुए है.</p>



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