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	<title>​सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j) &#8211; TIMES OF CRIME</title>
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	<description>‘‘टाइम्स ऑफ क्राइम’’ (अपराध जगत का लेखा-जोखा )</description>
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		<title>सूचना के अधिकार ( RTI ) : पति और पत्नी को है एक दूसरे की जानकारी पाने का अधिकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[TIMES OF CRIME]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:45:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[RTI ( सूचना का अधिकार )]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[https://timesofcrime.com/]]></category>
		<category><![CDATA[rti]]></category>
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		<category><![CDATA[पति और पत्नी]]></category>
		<category><![CDATA[पति और पत्नी को है एक दूसरे की जानकारी पाने का अधिकार]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय]]></category>
		<category><![CDATA[​सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j)]]></category>
		<category><![CDATA[सूचना के अधिकार (RTI)]]></category>
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					<description><![CDATA[सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे&#160;&#160;(https://timesofcrime.com/&#160;)&#160;जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036 सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पति या पत्नी द्वारा एक-दूसरे की व्यक्तिगत जानकारी (जैसे आय, सर्विस रिकॉर्ड या अन्य विवरण) प्राप्त करने के संबंध में कानून काफी स्पष्ट है। विभिन्न न्यायालयों और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के...]]></description>
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<p><strong>सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे&nbsp;&nbsp;(https://timesofcrime.com/&nbsp;)&nbsp;जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036</strong></p>



<p>सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पति या पत्नी द्वारा एक-दूसरे की व्यक्तिगत जानकारी (जैसे आय, सर्विस रिकॉर्ड या अन्य विवरण) प्राप्त करने के संबंध में कानून काफी स्पष्ट है। विभिन्न न्यायालयों और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के निर्णयों के आधार पर इसकी स्थिति इस प्रकार है :</p>



<h3 class="wp-block-heading">​1. वेतन और आय की जानकारी (Salary Details) &#8211;</h3>



<p>​सबसे अधिक विवाद इसी विषय पर होता है। कानून के अनुसार पति या पत्नी अपने साथी के कुल वेतन,भत्ते की जानकारी RTI के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।&nbsp;</p>



<p>मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) और राज्य सूचना आयोगों के निर्णयों के अनुसार, लोक सेवक (Public Servant) का वेतन सार्वजनिक धन से दिया जाता है, इसलिए इसकी जानकारी मांगी जा सकती है।&nbsp;</p>



<p>यह जानकारी कोई अन्य व्यक्ति भी मांग सकता है।</p>



<p>* ​कटौतियां (Deductions) : वेतन से होने वाली व्यक्तिगत कटौतियां (जैसे LIC प्रीमियम, लोन की किस्त आदि) को &#8216;व्यक्तिगत जानकारी&#8217; माना जाता है और यह आमतौर पर साझा नहीं की जाती।</p>



<h3 class="wp-block-heading">​2. व्यक्तिगत जानकारी बनाम लोक हित &#8211;</h3>



<p>​सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j) किसी व्यक्ति की निजी जानकारी देने से छूट देती है, बशर्ते उसमें कोई बड़ा &#8216;जनहित&#8217; (Public Interest) न हो।</p>



<p>​अगर मामला भरण-पोषण (Maintenance) या घरेलू हिंसा के केस से जुड़ा है, तो न्यायालय अक्सर आय के प्रमाण के तौर पर जानकारी देने का आदेश देते हैं।</p>



<p>​सिर्फ संदेह या आपसी झगड़े के आधार पर किसी के बैंक स्टेटमेंट, कॉल रिकॉर्ड या निजी पत्राचार की जानकारी RTI से प्राप्त नहीं की जा सकती।</p>



<h3 class="wp-block-heading">​3. सर्विस रिकॉर्ड और अन्य विवरण &#8211;</h3>



<p>पति/पत्नी किस पद पर तैनात हैं और उनकी पोस्टिंग कहाँ है, यह जानकारी प्राप्त की जा सकती है।</p>



<p><strong>* ​सर्विस बुक :&nbsp;</strong></p>



<p>पूरी सर्विस बुक की कॉपी नहीं मांगी जा सकती क्योंकि इसमें नॉमिनी, स्वास्थ्य रिकॉर्ड और परिवार के अन्य सदस्यों की निजी जानकारी होती है। इन जानकारी को छुपा कर सर्विस बुककी शेष जानकारी दी जा सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">​4. तीसरे पक्ष की प्रक्रिया (Third Party Procedure)-</h3>



<p>​जब आप पति या पत्नी की जानकारी मांगते हैं, तो जन सूचना अधिकारी (PIO) धारा 11 के तहत उस व्यक्ति को नोटिस भेजता है। यदि वह व्यक्ति (पति या पत्नी) जानकारी साझा करने से मना कर देता है, तो भी PIO जानकारी दे सकता है। यदि वह जानकारी देने से इंकार कर देता है, तो आप प्रथम और द्वितीय अपील में चुनौती दे सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">* ​महत्वपूर्ण निर्णय :</h3>



<p>​रहमत उल्लाह बनाम सूचना आयुक्त के मामले में न्यायपालिका द्वारा यह स्पष्ट किया गया था कि पत्नी को अपने पति का वेतन जानने का अधिकार है, ताकि वह भरण-पोषण के अपने कानूनी अधिकार का प्रयोग कर सके।</p>



<p>•&nbsp; पति या पत्नी को एक दूसरे के कुल वेतन व संपत्ति की जानकारी न्यायालय के माध्यम से भी पाने का अधिकार है।</p>



<p>* राज्य सूचना आयुक्त के नाते हमने ऐसे अनेक पति-पत्नी को एक दूसरे की आय व संपत्ति और सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) की जानकारी दिलाई है।</p>
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