<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>RTI कानून जनता का हथियार है &#8211; TIMES OF CRIME</title>
	<atom:link href="https://timesofcrime.com/tag/rti-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%88/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://timesofcrime.com</link>
	<description>‘‘टाइम्स ऑफ क्राइम’’ (अपराध जगत का लेखा-जोखा )</description>
	<lastBuildDate>Wed, 28 Jan 2026 18:20:21 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>
	<item>
		<title>आरटीआई आवेदक पर सूचना आयोग सहित कोई भी विभाग नहीं लग सकता कोई पाबंदी : हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय</title>
		<link>https://timesofcrime.com/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%8b/</link>
					<comments>https://timesofcrime.com/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%8b/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[TIMES OF CRIME]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 18:20:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[RTI ( सूचना का अधिकार )]]></category>
		<category><![CDATA[RTI आवेदक को भविष्य में जानकारी मांगने से ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकता]]></category>
		<category><![CDATA[RTI कानून जनता का हथियार है]]></category>
		<category><![CDATA[rti छीना नहीं जा सकता]]></category>
		<category><![CDATA[आरटीआई]]></category>
		<category><![CDATA[ओडिशा हाई कोर्ट]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://timesofcrime.com/?p=1407</guid>

					<description><![CDATA[सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036   ओडिशा हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी विभाग या आयोग किसी RTI आवेदक को भविष्य में जानकारी मांगने से ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकता। RTI कानून जनता का हथियार है और इसे छीना नहीं...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036  </strong></p>



<p>ओडिशा हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी विभाग या आयोग किसी RTI आवेदक को भविष्य में जानकारी मांगने से ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकता। RTI कानून जनता का हथियार है और इसे छीना नहीं जा सकता।&#8221;</p>



<p>हाई कोर्ट का यह फैसला सूचना के अधिकार (RTI) की मूल भावना को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा कदम है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कोई भी सूचना आयोग अपनी मर्जी से नागरिकों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों को सीमित नहीं कर सकता।</p>



<p>​​ओडिशा राज्य सूचना आयोग ने एक आदेश पारित कर एक आरटीआई आवेदक पर नई आरटीआई लगाने पर पाबंदी लगा दी थी। आयोग का तर्क था कि संबंधित आवेदक बार-बार आवेदन देकर सरकारी मशीनरी का समय बर्बाद कर रहा है और यह आरटीआई का दुरुपयोग है।</p>



<p>​​ओडिशा हाई कोर्ट की एकल पीठ ने इस आदेश को अवैध और असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया।</p>



<p>कोर्ट ने साफ किया कि सूचना का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है।</p>



<p>सूचना आयोग के पास ऐसा कोई कानूनी अधिकार (Jurisdiction) नहीं है कि वह किसी नागरिक को भविष्य में जानकारी मांगने से रोक सके।</p>



<p>यदि कोई आवेदक बार-बार जानकारी मांगता है तो आरटीआई कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों (जैसे धारा 7(9)) का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना कानून के दायरे से बाहर है।</p>



<p>सूचना आयोग का काम कानून को लागू करना और जानकारी दिलवाना है, न कि नागरिकों के अधिकारों पर कैंची चलाना।</p>



<p>​​यह निर्णय उन सभी आरटीआई कार्यकर्ताओं और नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें अक्सर &#8220;परेशान करने वाला&#8221; (Vexatious) बता कर उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश की जाती है।<br><strong>केस का विवरण &#8211;</strong></p>



<p>• ​केस का नाम : प्रफुल्ल कुमार जेना बनाम ओडिशा राज्य सूचना आयोग और अन्य</p>



<p>• केस नंबर : WP(C) NO. 34339 of 2023</p>



<p>• ​कोर्ट : ओडिशा हाई कोर्ट, कटक</p>



<p>• ​न्यायाधीश : जस्टिस बिपिन चंदर चतुर्वेदी</p>



<p>• आदेश दिनांक : 21-03-2024</p>



<p>​</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी व्यक्ति को भविष्य में आवेदन करने से रोक सके।</strong></li>



<li><strong>​राज्य सूचना आयोग के पास किसी नागरिक को सूचना का अधिकार इस्तेमाल करने से रोकने की न्यायिक शक्ति नहीं है।</strong></li>



<li><strong>आवेदक को &#8216;परेशान करने वाला&#8217; मान कर उस पर प्रतिबंध लगाने के सूचना आयोग के तर्क को हाई कोर्ट ने पूरी तरह गलत माना और कहा कि यह कानून की मूल भावना के खिलाफ है।</strong></li>
</ul>



<p>* आरटीआई एक्ट की धारा 7(9) में प्रावधान है कि किसी सूचना को साधारण तौर पर उसी प्ररूप (form) में उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें उसे मांगा गया है,</p>



<p>जब तक कि वह लोक प्राधिकारी के स्रोतों को गैर आनुपातिक रूप से विचलित न करता हो या संबंधित अभिलेख की सुरक्षा या संरक्षण के प्रतिकूल न हो।</p>



<p>इसके विपरीत स्थिति बनने पर सूचना देने का रूप बदला जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://timesofcrime.com/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%8b/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
