<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>UNSC &#8211; TIMES OF CRIME</title>
	<atom:link href="https://timesofcrime.com/tag/unsc/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://timesofcrime.com</link>
	<description>‘‘टाइम्स ऑफ क्राइम’’ (अपराध जगत का लेखा-जोखा )</description>
	<lastBuildDate>Fri, 09 Jan 2026 17:08:54 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>
	<item>
		<title>वेनेजुएला के राष्‍ट्रपति निकोलस मादुरो अपहरण को लेकर बुलाई गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक काफी हंगामेदार</title>
		<link>https://timesofcrime.com/%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%8f%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf/</link>
					<comments>https://timesofcrime.com/%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%8f%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[TIMES OF CRIME]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 17:08:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[UNSC]]></category>
		<category><![CDATA[राष्‍ट्रपति निकोलस मादुरो]]></category>
		<category><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://timesofcrime.com/?p=1265</guid>

					<description><![CDATA[वेनेजुएला के राष्‍ट्रपति निकोलस मादुरो अपहरण को लेकर बुलाई गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक काफी हंगामेदार नजर आ रही है. रूस और चीन सहित कोलंबिया जैसे देशों ने डॉनल्‍ड ट्रंप के इस न्‍यू नॉर्मल को आड़े हाथों लिया. चारों तरफ से घिरे अमेरिका की तरफ से बेबाकी से कहा गया कि उनका...]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>वेनेजुएला के राष्‍ट्रपति निकोलस मादुरो अपहरण को लेकर बुलाई गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक काफी हंगामेदार नजर आ रही है. रूस और चीन सहित कोलंबिया जैसे <a></a>देशों ने डॉनल्‍ड ट्रंप के इस न्‍यू नॉर्मल को आड़े हाथों लिया.</p>



<p>चारों तरफ से घिरे अमेरिका की तरफ से बेबाकी से कहा गया कि उनका वेनेजुएला पर कब्‍जा करने का कोई इरादा नहीं है. यह केवल ड्रग्‍स के खिलाफ कार्रवाई है. रूस और कोलंबिया ने संयुक्त रूप से अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए इसे &#8216;अंतरराष्ट्रीय अपराध&#8217; करार दिया है. रूस ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वाशिंगटन ने वेनेजुएला की संप्रभुता को कुचलकर दुनिया के सामने एक खतरनाक मिसाल पेश की है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8220;मादुरो और उनकी प*त्नी को तुरंत रिहा करे अमेरिका&#8221;</h3>



<p>UNSC में रूस के प्रतिनिधि ने अमेरिका की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि इस सशस्त्र ह*मले का कोई भी तर्कसंगत आधार नहीं हो सकता. रूस ने वेनेजुएला के लोगों के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए मांग की है कि अमेरिका राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बिना शर्त रिहा करे. रूस ने साफ कहा कि अमेरिका ने बातचीत और कूटनीति का रास्ता छोड़कर बंदूक के द*म पर लोकतंत्र की हत्या की है. रूसी दूतावास ने इसे राजकीय आ*तंकवा*द के समान बताया है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">कोलंबिया की गुहार</h3>



<p>कोलंबिया के अनुरोध पर ही यह आपातकालीन बैठक बुलाई गई. कोलंबिया ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को वेनेजुएला की राजनीतिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन बताया. कोलंबियाई प्रतिनिधि ने परिषद को धन्यवाद देते हुए कहा कि अमेरिका ने 3 जनवरी की कार्रवाई में किसी भी अंतरराष्ट्रीय नियम का सम्मान नहीं किया. कोलंबिया ने मांग की है कि इस तनाव को कम करने के लिए तत्काल प्रभाव से संवाद और कूटनीति का सहारा लिया जाना चाहिए.</p>



<h3 class="wp-block-heading">संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी</h3>



<p>UN अंडर-सेक्रेटरी जनरल रोज़मेरी डिकार्लो ने ब्रीफिंग के दौरान स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया. उन्होंने चेतावनी दी कि 3 जनवरी की कार्रवाई ने एक ऐसा खतरनाक मिसाल सेट कर दिया है, जिससे भविष्य में किसी भी देश की संप्रभुता सुरक्षित नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि स्थिति अभी भी नियंत्रण में आ सकती है यदि कानून की शक्ति को सर्वोपरि रखा जाए.</p>



<h3 class="wp-block-heading">अमेरिका की वेनेजुएला संकट पर सफाई</h3>



<p>चौतरफा घिरे अमेरिका ने अपना बचाव करते हुए एक चौंकाने वाला बयान दिया. अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा, &#8220;हम किसी देश पर कब्जा नहीं कर रहे हैं. यह कोई युद्ध नहीं बल्कि &#8216;लॉ एनफोर्समेंट एक्शन&#8217; (कानूनी कार्रवाई) थी.&#8221; अमेरिका ने निकोलस मादुरो को राष्ट्रपति मानने से इनकार करते हुए उन्हें महज एक &#8216;नार्को-ट्रैफिकर&#8217; (नशीले पदार्थों का तस्कर) करार दिया. अमेरिका का तर्क है कि मादुरो ने पश्चिमी गोलार्ध को अस्थिर करने की कोशिश की, इसलिए उन पर अमेरिकी अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा.भारत की भूमिका पर दुनिया की नजर</p>



<h3 class="wp-block-heading">डेनमार्क और लातविया यूएस के एक्‍शन से घबराए</h3>



<p>वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बहस के दौरान डेनमार्क, लातविया और पनामा जैसे देशों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी. दिलचस्प बात यह है कि इन देशों ने जहां एक तरफ मादुरो शासन की कमियां गिनाईं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की एकतरफा सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने से भी बचते नजर आए.</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8216;बंदूक से नहीं नियमों से चलेगी दुनिया&#8217;</h3>



<p>डेनमार्क ने सुरक्षा परिषद में दो टूक कहा कि वेनेजुएला की घटना एक &#8216;खतरनाक मिसाल&#8217; (Dangerous Precedent) पेश करती है. डेनमार्क ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून का हर हाल में पालन हो. हालांकि, डेनमार्क और लातविया दोनों ने मादुरो शासन की विफलताओं का जिक्र किया, लेकिन उन्होंने समाधान के लिए केवल &#8216;कूटनीति और बातचीत&#8217; पर जोर दिया. लातविया ने कहा कि वेनेजुएला के भविष्य का फैसला बंदूक से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में होना चाहिए.</p>



<h3 class="wp-block-heading">पनामा का सख्त रुख</h3>



<p>पनामा ने वेनेजुएला की बिगड़ती स्थिति के लिए सीधे तौर पर मादुरो शासन को जिम्मेदार ठहराया. पनामा के प्रतिनिधि ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय वेनेजुएला की मानवीय स्थिति को नजरअंदाज नहीं कर सकता. पनामा ने मांग की कि वेनेजुएला में सभी राजनीतिक कै*दियों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए. साथ ही, पनामा ने संप्रभुता के प्रति अपनी कटिबद्धता दोहराते हुए संकेत दिया कि वे किसी भी देश में बाहरी हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं हैं.</p>



<p>क्या युद्ध की ओर बढ़ रहा है लैटिन अमेरिका?</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://timesofcrime.com/%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%8f%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
