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कलचुरी होटल में टेंट घोटाला : पर्यटन विकास निगम अफसरों का खेल बेनकाब – सूचना छुपाने के लिए ‘कृत्य की श्रेणी’ की धमकी

जबलपुर: पर्यटन विकास निगम अफसरों का खेल बेनकाब - सूचना छुपाने के लिए 'कृत्य की श्रेणी' की धमकी, FAA ने भी आँखें मूंदीं

टाइम्स ऑफ क्राइम // विनय डेविड : 9893221036

टाइम्स ऑफ क्राइम के संपादक विनय जी डेविड ने 4 दिसंबर 2025 को RTI लगाकर होटल कलचुरी में लगे टेंट के बिल, वर्क ऑर्डर और टेंडर की जानकारी मांगी थी। शिकायतें थीं कि टेंट के ठेके में भ्रष्टाचार हुआ है।

6 जनवरी 2026 को लोक सूचना अधिकारी श्री संजय मल्होत्रा ने जवाब भेजा। हैरानी की बात ये कि जवाब के साथ प्रबंधक कलचुरी का पत्र लगा था जिसमें लिखा था – 

RTI एक्ट की धारा 6(2) साफ कहती है कि आवेदक से जानकारी मांगने का कारण नहीं पूछा जा सकता। “कृत्य की श्रेणी” जैसा कोई शब्द कानून में है ही नहीं। ये सीधी-सीधी धमकी थी।


  1. 06.01.2026: PIO ने पूछा – “निजी हित या जनहित?” – धारा 6(2) का उल्लंघन
  2. खुलासा: PIO और प्रबंधक कलचुरी एक ही अफसर – हितों का टकराव
  3. 08.05.2026: FAA का आदेश – “व्यवसायिक संस्था” बताकर इनकार, पर धारा नहीं बताई
  4. देरी: RTI का जवाब 3 दिन लेट, FAA का आदेश 61 दिन लेट
  5. 30.05.2026: द्वितीय अपील दायर, दोनों अफसरों पर पेनाल्टी की मांग

जांच में सामने आया कि प्रबंधक कलचुरी रेसीडेंसी और क्षेत्रीय प्रबंधक/PIO जबलपुर – दोनों पदों का चार्ज श्री संजय मल्होत्रा के पास ही है। यानी उन्होंने पहले प्रबंधक बनकर गैर-कानूनी सवाल पूछा, फिर PIO बनकर अपने ही सवाल को सही ठहरा दिया। कानून कहता है – “कोई भी व्यक्ति अपने ही केस में जज नहीं हो सकता।”

प्रथम अपील पर सुनवाई करते हुए FAA श्री संदेश यशलाहा ने 8 मई 2026 को आदेश दिया कि MPTDC “व्यवसायिक संस्था” है, इसलिए बिंदु 1 से 4 की जानकारी “व्यवसायिक दृष्टि से देना संभव नहीं”। मजे की बात ये कि इसी आदेश में बिंदु 5 की जानकारी देने को कहा गया।

सवाल ये है कि जब MPTDC पर RTI लागू है तभी तो बिंदु 5 की जानकारी दी, फिर 1-4 के लिए कानून कैसे बदल गया? FAA ने आदेश में RTI की किसी धारा का हवाला तक नहीं दिया। ऊपर से 45 दिन की जगह 106 दिन में फैसला सुनाया।

  1. PIO संजय मल्होत्रा पर धारा 20(1) के तहत ₹25,000 पेनाल्टी लगे, क्योंकि उन्होंने कानून तोड़ा, देरी की और हितों के टकराव में आदेश दिया।
  2. FAA संदेश यशलाहा पर धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई हो, क्योंकि उन्होंने बिना विधिक आधार के अपील खारिज की।
  3. 10 दिन में सारी जानकारी निःशुल्क दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट RBI vs Jayantilal Mistry केस में कह चुका है – “पारदर्शिता नियम है, गोपनीयता अपवाद है।” MPTDC 100% सरकारी कंपनी है। सरकारी पैसा, सरकारी जमीन पर बने होटल के टेंट का बिल “व्यापारिक गोपनीयता” कैसे हो सकता है? अगर बिल साफ है तो छुपा क्यों रहे हैं?

टाइम्स ऑफ क्राइम इस मामले की सुनवाई तक नजर रखेगा। सूचना आयोग अब तय करेगा कि अफसर कानून से ऊपर हैं या नहीं।

RTI के बड़े खेल: एक नजर में

  1. 06.01.2026: PIO ने पूछा – “निजी हित या जनहित?” – धारा 6(2) का उल्लंघन
  2. खुलासा: PIO और प्रबंधक कलचुरी एक ही अफसर – हितों का टकराव
  3. 08.05.2026: FAA का आदेश – “व्यवसायिक संस्था” बताकर इनकार, पर धारा नहीं बताई
  4. देरी: RTI का जवाब 3 दिन लेट, FAA का आदेश 61 दिन लेट
  5. 30.05.2026: द्वितीय अपील दायर, दोनों अफसरों पर पेनाल्टी की मांग

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