“कलचुरी होटल में टेंट घोटाला ? RTI मांगने पर PIO ने पूछा- ‘निजी हित है या जनहित’, फिर खुद ही अपने आदेश को सही ठहराया”
“जबलपुर: MPTDC अफसरों का खेल बेनकाब – सूचना छुपाने के लिए ‘कृत्य की श्रेणी’ की धमकी, FAA ने भी आँखें मूंदीं”
“सूचना आयोग पहुंचा कलचुरी होटल टेंट टेंडर मामला: PIO और FAA दोनों पर पेनाल्टी की मांग”
टाइम्स ऑफ क्राइम // विनय डेविड : 9893221036
जबलपुर। मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अफसरों ने सूचना का अधिकार कानून को मजाक बनाकर रख दिया। होटल कलचुरी जबलपुर में “कौशिक टेंट हाउस” को दिए गए टेंडर की जानकारी मांगने पर पहले लोक सूचना अधिकारी ने गैर-कानूनी सवाल दागे, फिर प्रथम अपीलीय अधिकारी ने बिना कानून बताए फाइल बंद कर दी। अब मामला राज्य सूचना आयोग पहुंच गया है।
क्या है पूरा मामला?
टाइम्स ऑफ क्राइम के संपादक विनय जी डेविड ने 4 दिसंबर 2025 को RTI लगाकर होटल कलचुरी में लगे टेंट के बिल, वर्क ऑर्डर और टेंडर की जानकारी मांगी थी। शिकायतें थीं कि टेंट के ठेके में भ्रष्टाचार हुआ है।
PIO ने कानून तोड़ा, धमकी भी दी
6 जनवरी 2026 को लोक सूचना अधिकारी श्री संजय मल्होत्रा ने जवाब भेजा। हैरानी की बात ये कि जवाब के साथ प्रबंधक कलचुरी का पत्र लगा था जिसमें लिखा था –
“जानकारी निजी हित के लिए माँगी जा रही है या जनहित, ये स्पष्ट करो… वरना ये कृत्य की श्रेणी में आता है।”
RTI एक्ट की धारा 6(2) साफ कहती है कि आवेदक से जानकारी मांगने का कारण नहीं पूछा जा सकता। “कृत्य की श्रेणी” जैसा कोई शब्द कानून में है ही नहीं। ये सीधी-सीधी धमकी थी।
RTI के बड़े खेल: एक नजर में
- 06.01.2026: PIO ने पूछा – “निजी हित या जनहित?” – धारा 6(2) का उल्लंघन
- खुलासा: PIO और प्रबंधक कलचुरी एक ही अफसर – हितों का टकराव
- 08.05.2026: FAA का आदेश – “व्यवसायिक संस्था” बताकर इनकार, पर धारा नहीं बताई
- देरी: RTI का जवाब 3 दिन लेट, FAA का आदेश 61 दिन लेट
- 30.05.2026: द्वितीय अपील दायर, दोनों अफसरों पर पेनाल्टी की मांग
सबसे बड़ा खेल: PIO और प्रबंधक एक ही आदमी
जांच में सामने आया कि प्रबंधक कलचुरी रेसीडेंसी और क्षेत्रीय प्रबंधक/PIO जबलपुर – दोनों पदों का चार्ज श्री संजय मल्होत्रा के पास ही है। यानी उन्होंने पहले प्रबंधक बनकर गैर-कानूनी सवाल पूछा, फिर PIO बनकर अपने ही सवाल को सही ठहरा दिया। कानून कहता है – “कोई भी व्यक्ति अपने ही केस में जज नहीं हो सकता।”
FAA ने भी आँख मूंद ली
प्रथम अपील पर सुनवाई करते हुए FAA श्री संदेश यशलाहा ने 8 मई 2026 को आदेश दिया कि MPTDC “व्यवसायिक संस्था” है, इसलिए बिंदु 1 से 4 की जानकारी “व्यवसायिक दृष्टि से देना संभव नहीं”। मजे की बात ये कि इसी आदेश में बिंदु 5 की जानकारी देने को कहा गया।
सवाल ये है कि जब MPTDC पर RTI लागू है तभी तो बिंदु 5 की जानकारी दी, फिर 1-4 के लिए कानून कैसे बदल गया? FAA ने आदेश में RTI की किसी धारा का हवाला तक नहीं दिया। ऊपर से 45 दिन की जगह 106 दिन में फैसला सुनाया।
अब सूचना आयोग में क्या मांग?
विनय डेविड ने 30 मई 2026 को द्वितीय अपील दायर कर दी है। मांग की है कि:
- PIO संजय मल्होत्रा पर धारा 20(1) के तहत ₹25,000 पेनाल्टी लगे, क्योंकि उन्होंने कानून तोड़ा, देरी की और हितों के टकराव में आदेश दिया।
- FAA संदेश यशलाहा पर धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई हो, क्योंकि उन्होंने बिना विधिक आधार के अपील खारिज की।
- 10 दिन में सारी जानकारी निःशुल्क दी जाए।
क्यों जरूरी है ये मामला?
सुप्रीम कोर्ट RBI vs Jayantilal Mistry केस में कह चुका है – “पारदर्शिता नियम है, गोपनीयता अपवाद है।” MPTDC 100% सरकारी कंपनी है। सरकारी पैसा, सरकारी जमीन पर बने होटल के टेंट का बिल “व्यापारिक गोपनीयता” कैसे हो सकता है? अगर बिल साफ है तो छुपा क्यों रहे हैं?
टाइम्स ऑफ क्राइम इस मामले की सुनवाई तक नजर रखेगा। सूचना आयोग अब तय करेगा कि अफसर कानून से ऊपर हैं या नहीं।
RTI के बड़े खेल: एक नजर में
- 06.01.2026: PIO ने पूछा – “निजी हित या जनहित?” – धारा 6(2) का उल्लंघन
- खुलासा: PIO और प्रबंधक कलचुरी एक ही अफसर – हितों का टकराव
- 08.05.2026: FAA का आदेश – “व्यवसायिक संस्था” बताकर इनकार, पर धारा नहीं बताई
- देरी: RTI का जवाब 3 दिन लेट, FAA का आदेश 61 दिन लेट
- 30.05.2026: द्वितीय अपील दायर, दोनों अफसरों पर पेनाल्टी की मांग