मध्यप्रदेश के दो पत्रकारों के लिए अगर सवाल पूछने की कीमत गिरफ्तारी हो, तो संविधान किताबों में रह जाएगा, ज़मीन पर नहीं
अभिमनोज राजस्थान पुलिस द्वारा मध्य प्रदेश के दो पत्रकारों आनंद पांडेय और हरीश दिवेकर की गिरफ्तारी ने पूरे देश में एक बार फिर उस प्रश्न को जीवित कर दिया है कि क्या सत्ता के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले पत्रकारों के साथ राज्य मशीनरी निष्पक्ष रह पाती है? मामला सतह पर भले ही “उगाही” और “झूठी…