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दलाई लामा ने उत्तराधिकारी पर दिया बयान : पुनर्जन्म तय करने का अधिकार

दलाई लामा ने उत्तराधिकारी पर दिया बयान : पुनर्जन्म तय करने का अधिकार

दलाई लामा के पुनर्जन्म को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता जा रहा है. भारत में चीन के राजदूत शू फेईहोंग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 14वें दलाई लामा को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि पुनर्जन्म की सदियों पुरानी परंपरा चलेगी या नहीं. उनका यह बयान उस वक्त आया जब दलाई लामा ने अपने उत्तराधिकारी की योजना सार्वजनिक की और पहली बार पुनर्जन्म को लेकर अपना विश्वास जताया.

चीनी राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, ‘दलाई लामाओं का पुनर्जन्म न तो वर्तमान दलाई लामा से शुरू हुआ और न ही उनके साथ खत्म होगा.’ उन्होंने इसे 700 साल पुरानी परंपरा बताया और दावा किया कि यह एक धार्मिक परंपरा है जो सिर्फ किसी एक व्यक्ति के अधिकार में नहीं है.

चीन के मुताबिक, ‘लिविंग बुद्धा पुनर्जन्म प्रणाली’ तिब्बती बौद्ध धर्म की एक विशिष्ट धार्मिक पद्धति है, जो तिब्बत और उसके आसपास के क्षेत्रों जैसे सिचुआन, युन्नान, गांसू, और छिंगहाई में आज भी सक्रिय है. वहां 1,000 से अधिक पुनर्जन्म परंपराएं चल रही हैं.

धर्मशाला में आयोजित अपने 90वें जन्मदिवस के सम्मेलन में दलाई लामा ने कहा कि उनके उत्तराधिकारी की पहचान एक ट्रस्ट द्वारा की जाएगी, न कि चीन सरकार द्वारा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में आध्यात्मिक नेता, निर्वासित तिब्बती सरकार और अन्य जरूरी पक्ष शामिल होंगे.

बीजिंग ने 2007 के उस कानून का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि पुनर्जन्म का अधिकार राज्य के नियंत्रण में है. हालांकि, तिब्बती समुदाय और बौद्ध धर्मगुरु इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हैं.

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