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एक सूची उन भ्रष्ट अधिकारियों की भी बनाएं, जिनके दफ्तरों में बार-बार RTI आवेदन लगाए जाते हैं : राहुल सिंह पूर्व राज्य सूचना आयुक्त

एक सूची उन भ्रष्ट अधिकारियों की भी बनाएं, जिनके दफ्तरों में बार-बार RTI आवेदन लगाए जाते हैं : राहुल सिंह पूर्व राज्य सूचना आयुक्त

RTI आवेदन बार-बार लगाने वालों की सूची तैयार करने का आपका विचार स्वागत योग्य है। पर साथ ही, कुछ और सूचियों की जरूरत है :-

  • 👉 एक सूची उन भ्रष्ट अधिकारियों की भी बनाएं, जिनके दफ्तरों में बार-बार RTI आवेदन लगाए जाते हैं।
  • 👉 एक सूची उन भ्रष्ट कामों की भी बनाएं, जिनकी जानकारी को बार-बार RTI में छिपाने का प्रयास किया जाता है।
  • 👉 एक सूची उन अधिकारियों की भी जारी करें, जो कहते हैं कि RTI की वजह से “विकास कार्य” रुक रहे हैं।
  • 👉 एक सूची उन अधिकारियों की भी बनानी चाहिए, जो RTI लगाकर ब्लैकमेल करने वालों के विरूद्ध BNS की धारा 351 के तहत FIR दर्ज नहीं कराते। जबकि BNS में FIR दर्ज़ कराने के स्पष्ट प्रावधान है।
  • 👉 और एक सूची उन अधिकारियों की भी बननी चाहिए, जिनके पक्ष में कुछ तथाकथित RTI आवेदक “संतुष्टि का प्रमाण पत्र” देकर, सूचना आयोग में अपीलों को खारिज करवाने का खेल खेलते हैं।

मप्र में सूचना आयुक्त रहते हुए मैंने कुछ RTI आवेदक और अधिकारी के मैच फिक्सिंग के खेल को बेहद करीब से देखा और संभवत मैं देश में एक मात्र सूचना आयुक्त रहा जिसने RTI आवेदक के संतुष्टि प्रमाण पत्र के बावजूद अधिकारियों के विरुद्ध पेनल्टी लगाने की कार्रवाई की।

मुझे इस बात की भी छोटी सी जिज्ञासा है कि वह कौन से ऐसे पावन, पुनीत विकास कार्य है जिसको लेकर हमारे ईमानदार अधिकारी ब्लैकमेल हो रहे हैं।

वैसे, प्रशासन का इतना कीमती समय इतनी सारी सूचियां बनाने में नष्ट न हो, इसका एक सरल उपाय भी है:-

पिछले 19 वर्षों से RTI Act 2005 की धारा 4 में स्पष्ट प्रावधान है कि सभी सार्वजनिक जानकारियां स्वतः पब्लिक डोमेन में उपलब्ध कराई जाएं। अगर यह प्रावधान पूरी ईमानदारी से लागू कर दिया जाए, तो RTI का टंटा ही ख़त्म हो जाएगा।

हाँ, ये बात अलग है कि जब प्रशासन के सारे कामकाज पारदर्शिता से पब्लिक के सामने आने लगेंगे, तो जिस “विकास कार्य” में तेजी लाने की बात की जाती है, वहाँ शायद मंदी का माहौल बन जाए। ख़ैर आप सूची बनाए। ये जो पब्लिक है सब जानती है 😎

🙏🏼

सूचियों के इंतजार में।

राहुल सिंह

पूर्व राज्य सूचना आयुक्त

आरटीआई के तहत बार-बार आवेदन लगाने वालों की सूची तैयार कर रहा प्रशासन

एक्टिविस्ट बोले- इससे पारदर्शिता खत्म होगी

मध्यप्रदेश शासन सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत बार-बार आवेदन लगाकर जानकारी मांगने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। हाल ही में शासन की ओर से सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके ऐसे लोगों की सूची मांगी गई है, जो बार-बार आरटीआई का उपयोग कर जानकारी मांग रहे हैं। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर सभी विभागों द्वारा ऐसे लोगों की सूची तैयार की जा रही है।

इधर, आरटीआई एक्टिविस्ट इसके विरोध में आ गए हैं। उनका कहना है कि आरटीआई पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। जो लोग यह काम करते हैं, वह सरकार के काम और नीतियों की कमियां बताकर सुधार के लिए सुझाव देते हैं। RTI पूरी जानकारी नहीं मिलने पर कई बार लगानी पड़ती है आरटीआईः आरटीआई एक्टिविस्ट ने बताया कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता कम होगी।

आईटीआई कानून इसलिए बनाया गया था, ताकि आम जनता सरकार के कामों की जानकारी प्राप्त कर सके। आदतन सूचना मंगाने वालों की सूची बनाने के पीछे सरकार का क्या उद्देश्य है, इसका अंदाजा नहीं है। कई बार एक आवेदन में संपूर्ण जानकारी नहीं मिलती इसलिए बार-बार आवेदन लगाए जाते हैं। हालांकि उन लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, जो इसका उपयोग जन कल्याण के बजाए निजी स्वार्थ के लिए करते हैं।

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