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मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान, 70 साल से ऊपर वालों के बुजुर्गों को घर पर देंगे उपचार, एक ब्लड सैंपल से होंगे सारे टेस्ट

मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान, 70 साल से ऊपर वालों के बुजुर्गों को घर पर देंगे उपचार, एक ब्लड सैंपल से होंगे सारे टेस्ट

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  • रोगी मित्र अस्पतालों में बुजुर्गों की मदद करेंगे, चिकित्सकों के 325 पद भरेगी सरकार

हिमाचल. हिमाचल सरकार प्रदेश में 70 वर्ष की आयु से ऊपर के बुजुर्गों को घर में उपचार की व्यवस्था करेगी। इसके लिए सरकार जल्द ही एक योजना लाने जा रही है। सरकारी अस्पतालों में भी बुजुर्गों की मदद रोगी मित्र करेंगे। सरकार प्रदेश में 325 चिकित्सकों के पद भरेगी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इनकी तैनाती होगी। वहीं, राज्य में मेडिकल कालेज और प्रत्येक सीएचसी में अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक का प्रबंध भी सरकार कर रही है। प्रदेश के मीडिया ग्रुप ‘दिव्य हिमाचल’ के ‘डाक्टर्स अवार्ड’ समारोह में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने संबोधन में ये खुलासे किए। यह आयोजन रविवार सायं होटल पीटरहॉफ में हुआ। सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में 70 वर्ष की आयु से ऊपर के बुजुर्गों के लिए सरकार एक नई योजना लाने जा रही है। इस योजना के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं प्रदान करने वाले चिकित्सक घर पर जाकर बुजुर्गों का इलाज करेंगे।

उन्होंने कहा कि पीएचसी में चिकित्सकों की तैनाती के लिए सरकार 325 पदों को भी भरने जा रही है। उन्होंने कहा कि रोगी मित्र अस्पताल में आने वाले बुजुर्गों का चैकअप करवाएंगे और उन्हें घर तक छोडऩे की भी जिम्मेदारी रहेगी। इसके अलावा अगर बुजुर्ग को उपचार के लिए आगे ले जाने की आवश्यकता होगी, उसकी व्यवस्था भी यह देखेंगे। उन्होंने खुलासा किया कि शिमला के चमियाणा में डिजिटल सबस्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) के लिए 20 करोड़ रुपए की राशि की मंजूरी दे दी है। डीएसए एक उन्नत एक्स-रे तकनीक है, जो रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी संरचनाओं की स्पष्ट तस्वीरें लेने के लिए उपयोग होती है। सीएम सुक्खू ने ऐलान किया कि प्रदेश में एक वर्ष के भीतर सभी मेडिकल कालेजों और सीएचसी सहित सभी जिला अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके लिए सरकार 3000 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मेडिकल कालेजों में भी सरकार अगले वर्ष से पीजी कक्षाएं आरंभ करने जा रही है। उन्होंने कहा कि चमियाना, आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कालेज में उन्नत स्मार्ट लैब के लिए 75 करोड़ रुपए की राशि की स्वीकृति दी है। स्मार्ट लैब के माध्यम से एक ही ब्लड सैंपल से बीमारी का स्टीक पता चलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के चमियाणा और टांडा में रोबोटिक सर्जरी आरंभ की है। अब प्रदेश के दो मेडिकल कालेजों में आर्थो की रोबेटिक सर्जरी की दिशा में कदम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत सुपर स्पेशलिटी डाक्टरों को मेडिकल कालेज में लिया जाएगा और उनके लिए डेजिगनेटड एसीस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट क्रिएट की जा रही है, जबकि सुपर स्पेशलिट डाक्टरों के लिए 20 प्रतिशत इनसेंटिव का प्रावधान भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सा विज्ञान में एआई और जेनरेटिक एआई का इस्तेमाल करने जा रहे है और इसको लेकर चिकित्सकों से भी बातचीत की जा रही है। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आरएस बाली, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, सूचना एवं जन संपर्क विभाग के निदेशक राजीव कुमार, स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर गोपाल बेरी, आईजीएमसी की प्रिंसिपल डॉक्टर सीता ठाकुर, स्वास्थ्य सुरक्षा के निदेशक जितेंद्र सांजटा, हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन से डॉ राणा, आईजीएमसी आरडीए के पदाधिकारी, रिपन अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र रॉकी, दिव्य हिमाचल समाचार पत्र के क्षेत्रीय संपादक संजय अवस्थी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

सीएम ने कहा कि जिस बद्दी से सरकार को पहले 4000 करोड़ रुपए का आता था, अब केवल 150 करोड़ रुपए मिल रहा है। जीएसटी दरें बदलने से नुकसान हुआ है। सीएम ने कहा कि कंज्यूमर बेसड है। जीएसटी लगने के कारण यह बाहरी राज्यों को इसका लाभ मिल रहा है, जबकि जिस राज्य में फार्मा कंपनियों के माध्यम से करीब 35 प्रतिशत दवाइयां बनाई जा रही है, उस राज्य को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सीएम ने कहा कि जिन राज्यों में आबादी अधिक है, वहां दवाइयों की खपत ज्यादा है, जबकि हिमाचल को उसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीएम ने कहा कि यह मामला सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण के समक्ष उठाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लिए वित्तीय चुनौती सबसे बड़ी है। सरकार को छठे वेतन आयोग के एरियर के रूप में 10 हजार करोड़ बकाया मिला। ओपीएस के कारण जिस प्रदेश की 1600 करोड़ की बोरोइंग बंद कर दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की जो आरडीजी होती है, उसमें पिछले साल हमें 6200 करोड़ रुपए मिले। इस साल घटकर वो 3200 करोड़ रुपए रह गया। सीएम ने कहा कि जो 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य और केंद्र के बीच करों का वितरण होता है। 15वें वित्त आयोग के तहत टेपरिंग हुई है। 2019-20 में सरकार को जो 11,000 करोड़ रुपए मिलते थे। आज हमें 3200 करोड़ रुपए मिल रहे हैं। सीएम ने कहा कि हम इसे कैसे बदल रहे हैं। हमने उन कानूनों को रोका है, जिनके तहत भ्रष्टाचार के चोरों द्वारा जनता की संपत्ति लूटी जा रही थी और आम जनता को इसका पता भी नहीं चलता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन एक नारा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को परिवर्तित किया, जो बीते 40 साल से चली आ रही थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि 3500 करोड़ हम एयरपोर्ट के लिए खर्च करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र जीवन दिल्ली में सोने को नहीं मिलता था। हम सोफे पर ही सो जाते थे। इन समस्याओं को देखते हुए हमने द्वारका में हिमाचल निकेतन बनाया। ये मई में बनकर तैयार हो जाएगा। हिमाचल का जो भी छात्र वहां जाएगा, उसे बिना आवेदन किए कमरा मिल जाएगा।

सीएम सुक्खू ने कहा कि राजनीतिक दृष्टि से हमारे सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती वित्तीय क्षेत्र में है। आपदा के कारण राज्य को 44,000 करोड़ का नुकसान हुआ। 2023-24 में लगभग 500 लोगों की मृत्यु हुई। कई परिवारों ने जीवन भर की कमाई से घर बनाए थे और उन्हें पता भी नहीं था कि एक रात में सब कुछ खत्म हो जाएगा। पीने का पानी का गिलास नहीं बचा। सरकार ने ऐसे 23,000 लोगों को बचाया।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने सभागार में उपस्थित डाक्टर्स से एक अपील भी की। हालांकि उन्होंने आईजीएमसी में हुए प्रकरण का हवाला नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि डाक्टर मरीज के साथ अपनेपन से बात करें। इससे मरीज का आधा दर्द दूर हो जाता है। यदि मरीज को लाईलाज बीमारी है, तो भी जीने की हिम्मत देनी चाहिए। डाक्टर की सलाह का असर होता है।

सीएम ने कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस एमआरआई मशीनों को प्रदेश के पांच मेडिकल कालेजों में स्थापित किया जाएगा। 10 लाख की यह मशीन है। जब हम 40 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी से मेडिकल कालेज चलाते हैं, तो उन कालेजों का क्या होगा, डाक्टर तनाव में रहेंगे और चिड़चिड़े हो जाएंगे। इन्हीं बातों का अध्ययन सरकार ने किया और सभी मेडिकल कालेजों में 12 घंटे ड्यूटी की प्रणाली लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 23-24 में सेब का सीजन अपने चरम पर था। हमने एमआईएस के माध्यम से 140 करोड़ रुपए का प्रबंध किया, ताकि बागबानों को नुकसान न हो। सडक़ें टूट गई थीं, लोगों के पास पैसे नहीं थे। फिर भी सरकार ने किसी बागवान की पीठ पर बोझ नहीं डाला। समय से सभी सडक़ें ठीक की और समय पर बागबानों के सेब मंडी तक पहुंचाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाने को लकर ओज़ोनेशन तकनीक के लिए 100 करोड़ रुपए दिए हैं। विश्वस्तरीय जल शोधन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसे हम पांच जिलों में लागू कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि यह सरकार जनता के लिए है।

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में 750 स्कूलों को अन्य स्कूलों में मर्ज किया। इसका कारण यह है कि जिन स्कूलों में बच्चे पांच और शिक्षक तीन थे, ऐसे में बच्चों को स्कूलों मेें क्या एक्सपोजर मिलेगा? ऐसे में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल 50 विधानसभा क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं। अगले साल 10 स्कूल शुरू होंगे, जहां 1000 बच्चे पढ़ेंगे, खेलेंगे और उन्हें भोजन भी दिया जाएगा। इन स्कूलों में छात्रों को सीबीएसई सिलेबस की पढ़ाई करवाई जाएगी। वहीं, स्कूलों में खेल गतिविधियों के साथ पढ़ाई भी उत्तम मिलेगी। बच्चों को इन स्कूलों में बेहतर खाना भी उपलब्ध होगा। सीएम ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले खाने की न्यूट्रिशन वैल्यू को पूरी तरह से ध्यान में रखा जाएगा। इसके लिए सरकार न्यूट्रेशन पॉलिसी लाएगी।

‘डॉक्टर्स अवार्ड’ ‘दिव्य हिमाचल’ की अनूठी पहलमहिला डॉक्टरों के लिए अवार्ड में अलग सेग्मेंट का दिया सुझाव दियावरिष्ठ संवाददाता — शिमला

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि डाक्टर अवार्ड ‘दिव्य हिमाचल’ मीडिया समूह की अच्छी पहल है। सोशल मीडिया के दौर में पॉजिटिविटी को आगे बढ़ाने की आवश्यकता होती है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि इस अवार्ड में भविष्य में महिला डाक्टर के लिए भी एक सेगमेंट दिया जाए। इस कार्यक्रम में सम्मानित किए गए 14 डाक्टरों, एक प्रशासनिक अधिकारी और पांच हैल्थ केयर सेंटर को मुख्यमंत्री ने बधाई दी। सीएम ने कहा कि हमने सत्ता में आते ही गर्वनेंस की सोच को बदलने का नया आयाम आरंभ किया।

प्रशासन के तरीके को बदलने के लिए व्यवस्था परिवर्तन किया। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिर्वतन करना महज एक नारा नहीं है। 40 वर्षों से चली आ रही एक ही व्यवस्था को बदलने की कोशिश की है और उसे बदलने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हैल्थ सेक्टर में कभी किसी ने मुझसे कुछ नहीं मांगा, हमें मेडिकल टेक्नोलॉजी की जरूरत है।

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