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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त अरविंद कुमार शुक्ला पर लगाया गया ₹40 हजार का जुर्माना रद्द किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त अरविंद कुमार शुक्ला पर लगाया गया ₹40 हजार का जुर्माना रद्द किया

MP High Court : मप्र हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त अरविंद कुमार शुक्ला के विरुद्ध एकलपीठ द्वारा पारित 40 हजार जुर्माने वाला आदेश अनुचित पाकर निरस्त कर दिया। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की खण्डपीठ ने अपने आदेश में साफ किया कि अपीलकर्ता पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त का आदेश सद्भावनापूर्वक व अधिकारिक कर्तव्यों के वास्तविक निर्वहन में था। अपीलकर्ता को नोटिस भी जारी नहीं किया गया था। लिहाजा, उसके विरुद्ध पारित आदेश निरस्त किया जाता है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य पीठ (जबलपुर बेंच) ने पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त अरविंद कुमार शुक्ला के खिलाफ एकलपीठ द्वारा लगाए गए 40,000 रुपये के जुर्माने को रद्द कर दिया है। यह फैसला 26 जून 2025 को सुनाया गया।

मामले की पृष्ठभूमि :

एकलपीठ ने 5 मार्च 2025 को पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त अरविंद कुमार शुक्ला पर 40,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना आरटीआई अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध न कराने और आवेदक की अपील को अनुचित रूप से खारिज करने के कारण लगाया गया था।

एकलपीठ ने उस समय टिप्पणी की थी कि सूचना आयुक्त ने अपनी वैधानिक जिम्मेदारी का त्याग किया है और सरकार के “एजेंट” के रूप में काम किया है।

भोपाल निवासी नीरज निगम ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने पशुपालन विभाग से मुफ्त में जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की थी. क्योंकि जन सूचना अधिकारी ने उन्हें 30 दिनों की समय-सीमा के भीतर जानकारी प्रदान नहीं की थी।

खंडपीठ का फैसला:

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले की अंतिम सुनवाई की। 19 जून को पारित आदेश में, डिवीजन बेंच ने कहा कि पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त की कोई गलती नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा पारित आदेश सद्भाव में थे और उनके आधिकारिक कर्तव्यों का सही निर्वहन था।

कोर्ट ने न केवल अरविंद कुमार शुक्ला के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाया, बल्कि 40,000 रुपये का जुर्माना वसूलने के निर्देश को भी रद्द कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला मूल रिट याचिका के गुण-दोष (merits) को प्रभावित नहीं करेगा, क्योंकि विभाग ने भी उक्त आदेश के खिलाफ अलग से अपील दायर की है।

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